क्या डॉक्टर का सर्टिफिकेट देने से राहत  मिल जाती है ?

पक्ष - विपक्ष के वी एन कामेश्वर राव बनाम आदित्य बिड़ला हेल्थ 

अवार्ड नम्बर IO/HYD/A/HI/0153/2019-20

विवाद का कारण पूर्ववर्ती बीमारी 

दावे की राशि 164725 

राहत राशि प्रार्थित 164725 

निर्णय किसके पक्ष में बीमाकर्ता 

अवार्ड की तारीख 03/02/2020 

स्थान हैदराबाद 


मामले का सारांश

शिकायतकर्ता को Leptospirosis और मधुमेह टाइप 2 से पीड़ित पाया गया। मगर उनके दावे को बीमाकर्ता ने मानने से इंकार कर दिया। बीमाकर्ता ने  बताया कि उनके अन्वेषण में पाया गया कि मधुमेह बीमारी पॉलिसी प्रारम्भ  होने से पहले से थी। इसलिए क्लेम को स्वीकार नहीं किया गया। 


बीमा  लोकपाल का निर्णय 

शिकायतकर्ता ने तर्क दिया है कि अस्पताल की गलती से बीमारी को दो महीनों की जगह दो वर्ष दिखा दिया गया है। प्रस्ताव के समय बीमारी थी ही नहीं तो प्रकट करने का प्रश्न कैसे उठ सकता   है ? 

जांच पड़ताल के दौरान पाया गया कि बीमाकृत व्यक्ति Glycomet 850 mg का सेवन पॉलिसी आरम्भ होने से पहले से ही करते थे। बीमाकृत व्यक्ति ने स्वयं अस्पताल के अधिकारियों को बताया था कि इस दवा से उनका इलाज चल रहा है। Glycomet 850 mg मधुमेह टाइप 2 के मरीजों के ग्लूकोज के स्तर को कम करने में प्रभावी होती है। अगर अस्पताल ने गलती से दो महीनों की जगह दो साल लिख दिए तो शिकायतकर्ता ने पत्र लिख कर इसका संशोधन क्यों नहीं करवाया ?


रिमार्क 

अक्सर शिकायतकर्ता अपने डॉक्टर का सर्टिफिकेट पेश करके यह दलील देता है कि  बीमारी की अवधि गलती से अधिक लिख दी गयी है। लेकिन अन्य साक्ष्यों के अभाव में यह तर्क असरदार साबित नहीं होता है। 


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