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  लिखित संचार क्यों आवश्यक है ?   पक्ष - विपक्ष रेहाना सुलतान बनाम बजाज आलियांज अवार्ड नंबर  IO/BHP/R/GI/0210/2019-20 विवाद का कारण पॉलिसी को रद्द करना  दावे की राशि राहत  राशि प्रार्थित 400000  निर्णय किसके पक्ष में बीमाकृत  स्थान भोपाल  मामले का सारांश: शिकायतकर्ता की पॉलिसी  को बीमाकर्ता ने निरस्त कर दिया था।  बीमाकर्ता का का तर्क था कि ऐसा शिकायतकर्ता के अनुरोध पर किया गया।   इसलिए दावे निपटान का सवाल नहीं उठता है। प्रीमियम का प्रतिदाय (refund ) भी कर दिया गया है।  शिकायतकर्ता ने बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman ) से  अर्जी एक वर्ष के बाद दाखिल की है जो नियमों  के अनुरूप नहीं है।  लेकिन शिकायतकर्ता ने बताया कि  उसने पॉलिसी  निरस्त करने  का कोई आवेदन नहीं दिया था.  बीमा लोकपाल का निर्णय   शिकायतकर्ता ने बीमाकर्ता को पॉलिसी  निरस्त करने के विरोध में  जो पत्र लिखे थे उसको प्रस्तुत किया है। शिकायत दर्ज़ एक वर्ष की अवधि में हुई है...
  Dispute between Bhabagrahi Swain vs. Bharti Axa Life Award/Complaint No. IO/BHP/A/HI/0082/2019-20 Cause of dispute Short settlement(accident not covered) Amount of Claim Rs.960000 Relief sought Rs.649818 Decision in favour of Insurer Date of Award/Order 06/02/2020 Location Bhopal संक्षिप्त वृतांत बीमा धारक को एक दुर्घटना में सर पर काफी चोट आयी और उन्हें अस्पताल भर्ती होना पड़ा।  उनकी claim Rs. 649818 की थी लेकिन बीमा कम्पनी ने केवल 56000 का भुगतान किया. छुब्ध होकर लोकपाल के यहां शिकायत  दर्ज़ कर दी गयी.  बीमा कंपनी ने अपने बयान में बताया कि पॉलिसी दुर्घटना को cover नहीं करती। पालिसी सिर्फ जानलेवा बीमारियों को coverage देती है। पॉलिसी में एक rider है जिसके अंतर्गत  प्रतिदिन नकद भुगतान होता  है। Rider के अनुसार जो भुगतान किया गया है उसका विवरण इस प्रकार से है : ICU 10 days @ Rs.2000 per day Rs.20000 General 16 days @ Rs.1000 per day Rs.16000 Surgery Benefit Rs.20000 Total Rs.56000     लोकप...
  पक्ष विपक्ष डॉक्टर अजय कुमार जैन बनाम न्यू इंडिया  अवार्ड/शिकायत नंबर IO/BHP/A/HI/0084/2019-20 विवाद का कारण इलाज रक्षित नहीं, अस्पताल में भर्ती जरूरी नहीं   दावे की राशि Rs.470725  राहत राशि प्रार्थित Rs.470725  निर्णय किसके पक्ष में बीमा कंपनी  अवार्ड की तारीख 10 /02 /2020  स्थान भोपाल  मामले का सारांश  शिकायतकर्ता की पत्नी न्यू इंडिया में बीमाकृत थी। वह कैंसर से पीड़ित हो गईं। उनकी तरफ से दो याचिकाएं दाखिल की गई। उनके उपचार के लिए Trastuzumab ड्रग  का उपयोग हुआ था। लेकिन बीमा कंपनी ने दावे को अस्वीकार कर दिया।  कारण यह बताया गया यह ड्रग कैंसर विरोधी ड्रग नहीं है। यह सहायक चिकित्सा है और प्रतिरक्षा उपचार (immunotherapy)के अंतर्गत आता है जो इस पॉलिसी में बीमा रक्षित नहीं है।  दूसरी शिकायत chemo port हटाने को लेकर थी। इसके लिए बीमाकृत ने अस्पताल में दाखिला लिया था। बीमा कंपनी का ये तर्क था कि chemo port हटाने की प्रक्रिया दैनिक...
  Satwant Kaur vs. New India Assurance Company Limited यह मामला बीमा लोकपाल द्वारा काफी बार इस्तेमाल होता है। आईये देख़ते हैं कि इस मामले के खास पहलु। क्या था विवाद ? परियादी का पति New India Assurance Co. Ltd.का पॉलिसी धारक था। उनकी Rs.23271 की claim को बीमा कंपनी ने ख़ारिज कर दिया। New India का तर्क था कि बीमित व्यक्ति पूर्ववर्ती बीमारी से ग्रसित था। उनको मधुमेह तथा गुर्दे की लम्बे अरसे  से शिकायत थी। लेकिन यह बात प्रपोजल फॉर्म में बताई नहीं गई, इसलिए क्लेम स्वीकृत नहीं हुई। दो स्वतंत्र डॉक्टरों की भी राय ली गयी। उनका भी यह निष्कर्ष था कि पुरानी बीमारियों को छिपाया गया था।  डिस्ट्रिक्ट फोरम का निर्णय  डिस्ट्रिक्ट फोरम ने  आदेश दिया  कि स्वतंत्र डॉक्टरों की बात इसलिए नहीं मानी जा सकती है क्योंकि उन्होंने ने कभी भी बीमित व्यक्ति ( जिनका देहांत हो चुका था), का इलाज नहीं किया था। अस्पताल की भी रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं थी । पॉलिसी को दो साल आठ महीने के बाद रद्द   कर दिया गया जो उचित नहीं है। बीमा कंपनी का निर्णय गलत था क्योंकि तथ्यों को ध्यान में नहीं रखा गया...